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सोमवार, 10 अप्रैल 2017

बरसात के बाद

थप-थप थप-थप

सौंधी खुशबू घोल जाता है

हर बारिश में कोई

मेरे स्मृति-जगत में।

रात भर करवटें बदल

झाड़ता हूँ पैरों की अंगुलियों पे चिपकी बालुई रेत

पर जाने क्यों हट नहीं पाती पूरी तरह

और मैं यूँही करवटें बदलता रहता हूँ रात भर,

हर बारिश में।

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